ऐसे पक्षी जो दूसरे पक्षियों का घोंसला इस्तेमाल करते हैं Brood Parasitism
ऐसे पक्षी जो दूसरे पक्षियों का घोंसला इस्तेमाल करते हैं
Brood Parasitism
आम तौर पर जब हम पक्षियों के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में
सबसे पहले उनके खूबसूरत घोंसले आते है। ज्यादातर पक्षी अंडे देने
और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए घोंसला बनाते हैं। लेकिन प्रकृति
में कुछ ऐसे पक्षी भी हैं जो अपना घोंसला खुद नहीं बनाते। ये पक्षी
दूसरे पक्षियों के बनाए गए घोंसलों का इस्तेमाल करते हैं या अपने
अंडे दूसरे पक्षियों के घोंसलों में दे देते हैं।
इस तरह का व्यवहार प्रकृति में घोंसला परजीविता
(Brood Parasitism) के नाम से जाना जाता है।
आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ दिलचस्प पक्षियों के बारे में।
ऐसे पक्षी जो दूसरे पक्षियों का घोंसला इस्तेमाल करते हैं
Brood Parasitism
1. कोयल Cuckoo
कोयल इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। मादा कोयल अक्सर अपना
घोंसला नहीं बनाती। वह कौए जैसे दूसरे पक्षियों के घोंसले में अपना अंडा
दे देती है। कई बार कौआ उस अंडे को अपना समझकर उसे सेता है और
बच्चे को भी पालता है।
घोंसला परजीविता का सबसे बड़ा उदाहरण कोयल है कोयल अपना
घोंसला कभी नहीं बनती कोयल अक्सर कौवे के घोसले में अपने अंडे
रखती है केवल एंड ही नहीं रखती बल्कि एंड सैन्य और बच्चे निकलवाने
का काम भी कोई से लेती है साथ ही बच्चों की परवरिश भी कव से ही
करती है अगर आप कोयल के बारे में अधिक जानकारी लेना चाहते हैं तो
हमारी ये वीडियो देखें
2. काउ बर्ड Cow Bird
काउ बर्ड अपना घोंसला बनाने के बजाय दूसरे छोटे पक्षियों के घोंसलों में
अंडे देने के लिए जाना जाता है। जिस पक्षी के घोंसले में इसका अंडा होता
है, वही अक्सर काउ बर्ड के बच्चे को भी पालता है। यंग पैरेंटल केयर माता-
पिता वाली देखभाल की दूसरे पक्षी से देख कर आती है
3. हनीगाइड
अफ्रीका में पाए जाने वाले हनीगाइड पक्षी भी अपने अंडे दूसरे पक्षियों के
घोंसलों में देते हैं। इनके बच्चे बाहर निकलने के बाद दूसरे पक्षियों के बच्चों
के लिए काफी आक्रामक हो सकते हैं।
4. कॉमन कुकू
कॉमन कुकू भी अपना घोंसला बनाने के बजाय दूसरे पक्षियों के घोंसले का
इस्तेमाल करती है। इसकी मादा अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों के
घोंसलों में अंडे दे सकती है। इसके बच्चे अक्सर दूसरे बच्चों से पहले
निकलते हैं और ज्यादा भोजन प्राप्त कर लेते हैं। जिसके कारण उनकी
परवरिश अच्छी होती है ये बच्चे जल्दी हेल्दी होकर वहां से आसानी से उड़
उड़कर नौ दो ग्यारह हो जाते हैं
5. ब्लैक-हेडेड डक
कुछ जलपक्षी भी दूसरे पक्षियों के घोंसलों में अंडे देने के लिए जाने जाते हैं।
ब्लैक-हेडेड डक में ऐसा व्यवहार देखा गया है, जिसमें मादा दूसरे पक्षियों
के घोंसलों का इस्तेमाल कर सकती है।
6. गोल्डन-आई डक
गोल्डन-आई एक ऐसी बतख है जो कई बार दूसरे पक्षियों द्वारा बनाए गए
पेड़ के खोखलों या घोंसले की जगहों का इस्तेमाल करती है। हालांकि यह
पूरी तरह घोंसला न बनाने वाला पक्षी नहीं है, इसलिए इसे कोयल जैसे पूर्ण
घोंसला-परजीवी पक्षियों से अलग समझना चाहिए।
7. वुड डक
वुड डक भी अक्सर पेड़ों के प्राकृतिक खोखलों में अंडे देती है और कभी-
कभी दूसरे पक्षियों के घोंसले वाले खोखलों में भी अंडे रख सकती है। यह
व्यवहार घोंसला-स्थल के इस्तेमाल से जुड़ा है, न कि हमेशा पूरी तरह
घोंसला न बनाने से।
अब बात करते हैं उल्लू की।
घोंसला परजीविता दो प्रकार की होती है
पहला दुनिया भर में मशहूर कोयल और दूसरे पक्षी आते हैं जो अपना
घोंसला नहीं बनाते दूसरों के घोंसले में अंडे भी देते हैं और उनसे अपने
बच्चे भी निकलवाते हैं और बच्चों की परवरिश भी दूसरे पक्षियों से ही करा
लेते हैं
लेकिन उल्लू के केस में ऐसा नहीं है उल्लू केवल दूसरे पक्षियों या जानवरों
के बिल या घोंसले इस्तेमाल करता है लेकिन अपने बच्चे खुद निकलता है
और खुद ही अपने बच्चों की परवरिश करता है इस तरह के पक्षी घोंसला
तो दूसरे पक्षियों या दूसरे जानवरों का इस्तेमाल करते हैं घोसला बनाने की
मेहनत तो बचा लेते हैं लेकिन बच्चे खुद ही निकलते हैं खुद ही बच्चों की
परवरिश करते हैं
इसलिए यह कहना ज्यादा सही है कि बुरोइंग आउल दूसरे जानवरों के
बनाए बिलों का इस्तेमाल करता है, न कि यह कोयल की तरह दूसरे पक्षी
से अपने बच्चों की परवरिश करवाता है।
8. बुरोइंग आउल (Burrowing Owl)
अक्सर जमीन के अंदर बने बिलों में रहता और प्रजनन करता है। ये बिल
कई बार प्रेयरी डॉग जैसे दूसरे जानवरों द्वारा बनाए गए होते हैं।
9. लिटिल आउल
लिटिल आउल कई बार पेड़ों के खोखलों, चट्टानों की दरारों और इमारतों
की सुरक्षित जगहों में प्रजनन करता है। यह हमेशा कोई जटिल घोंसला नहीं
बनाता।
इसलिए इसे “घोंसला बनाने में कम मेहनत करने वाले पक्षियों” की श्रेणी में
रखा जा सकता है, लेकिन इसे सख्त अर्थ में घोंसला-परजीवी पक्षी नहीं
कहा जाना चाहिए।
10. बार्न आउल
बार्न आउल भी दूसरे कई पक्षियों की तरह टहनियों से सुंदर घोंसला बनाने
के लिए प्रसिद्ध नहीं है। यह अक्सर खलिहान, पुरानी इमारत, पेड़ के
खोखल या किसी सुरक्षित जगह पर अंडे देता है।
कई बार यह उसी जगह का इस्तेमाल करता है जो पहले से मौजूद हो।
असली बात क्या है?
यह समझना भी जरूरी है कि सभी पक्षी जो दूसरे पक्षियों के घोंसले का
इस्तेमाल करते हैं, वे अपना घोंसला कभी नहीं बनाते—ऐसा कहना सही
नहीं होगा। कुछ पक्षी अपना घोंसला खुद भी बनाते हैं और कभी-कभी
दूसरे पक्षियों के घोंसले का इस्तेमाल करते हैं।
लेकिन कोयल, कुकू, काउबर्ड और हनीगाइड जैसे पक्षी इस मामले में
सबसे खास हैं, क्योंकि इनमें दूसरे पक्षियों के घोंसलों में अंडे देने की आदत
बहुत अच्छी तरह विकसित हो चुकी है।
प्रकृति का अनोखा तरीका
पक्षियों की यह आदत सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह प्रकृति में
जीवित रहने का एक अनोखा तरीका है। घोंसला बनाने, अंडे सेने और
बच्चों की देखभाल में काफी ऊर्जा लगती है। कुछ पक्षियों ने इस काम के
लिए एक अलग रणनीति अपना ली है—वे अपने अंडों की जिम्मेदारी दूसरे
पक्षियों पर छोड़ देते हैं।
यही वजह है कि पक्षियों की दुनिया इतनी रोचक और रहस्यमयी है। एक
तरफ कुछ पक्षी कई दिनों तक मेहनत करके शानदार घोंसले बनाते हैं,
वहीं दूसरी तरफ कुछ पक्षी बिना अपना घोंसला बनाए ही अपनी अगली
पीढ़ी को आगे बढ़ा देते हैं।
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